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फैशन के नाम पर ये चीज़ें सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं

फैशन का पालन करना अच्छा है, लेकिन अपनी सेहत का ध्यान रखते हुए संतुलन बनाए रखना जरूरी है। हमेशा ऐसे फैशन ट्रेंड्स का चुनाव करें जो आरामदायक हों और आपके शरीर के लिए सुरक्षित भी।

1. टाइट जीन्स (Skinny Jeans) या बहुत टाइट कपड़े

टाइट जीन्स भले ही फैशन में हों, लेकिन लंबे समय तक इसे पहनने से शरीर की मांसपेशियों और रक्त संचार पर असर पड़ सकता है, जिससे पैरों में सुन्नता, दर्द, और यहां तक कि नसों पर दबाव भी बढ़ सकता है। इसे नियमित पहनना मांसपेशियों में खिंचाव का कारण बन सकता है।

गर्भावस्था के दौरान मानसिक विकार: कारण, लक्षण, उपचार और घरेलू उपाय

 गर्भावस्था हर महिला के जीवन का सबसे खूबसूरत और संवेदनशील चरण माना जाता है। लेकिन इस दौरान महिला न केवल शारीरिक रूप से, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी कई बदलावों से गुजरती है। अक्सर ये बदलाव सामान्य होते हैं, लेकिन कभी-कभी ये गंभीर मानसिक विकार (Mental Disorders During Pregnancy) का रूप ले लेते हैं।

यदि इन्हें समय पर पहचानकर सही उपचार न किया जाए, तो यह माँ और शिशु दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं।

गर्भावस्था के दौरान आम मानसिक विकार

1. अवसाद (Depression)

  • उदासी और निराशा की भावना

  • किसी भी काम में आनंद न मिलना

  • भूख और नींद में गड़बड़ी

  • आत्मग्लानि या बेकार होने की भावना

2. चिंता विकार (Anxiety Disorders)

  • अत्यधिक घबराहट और बेचैनी

  • पसीना आना और धड़कन तेज होना

  • बच्चे और प्रसव से जुड़ी लगातार चिंता

3. मूड डिसऑर्डर और मूड स्विंग्स

  • कभी गुस्सा तो कभी रोना

  • छोटी-सी बात पर चिड़चिड़ापन

  • भावनाओं पर नियंत्रण न रहना

4. ऑब्सेसिव कम्पल्सिव डिसऑर्डर (OCD)

  • बार-बार नकारात्मक विचार आना

  • बार-बार हाथ धोना या सफाई करना

  • किसी काम को दोहराते रहना

5. पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD)

  • पहले हुए गर्भपात या कठिन प्रसव का डर

  • बुरे सपने और फ्लैशबैक

  • प्रसव को लेकर लगातार भय

मानसिक विकारों के मुख्य कारण

  • हार्मोनल असंतुलन

  • सामाजिक और पारिवारिक दबाव

  • शारीरिक परेशानी और दर्द

  • रिश्तों में तनाव

  • पहले हुए गर्भपात/कठिन प्रसव का अनुभव

  • आर्थिक दबाव या भविष्य की चिंता

गर्भावस्था में मानसिक विकार के लक्षण

  • नींद और भूख में बदलाव

  • लगातार चिंता, तनाव या उदासी

  • काम में रुचि न होना

  • दूसरों से दूरी बनाना

  • आत्महत्या या खुद को नुकसान पहुँचाने के विचार (गंभीर स्थिति)

उपचार (Treatment)

1. मनोचिकित्सकीय परामर्श (Psychological Counseling)

  • कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी (CBT): नकारात्मक विचारों को बदलने में मदद करती है।

(कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी (CBT) - यह थेरेपी नकारात्मक विचारों को पहचानने और उन्हें सकारात्मक सोच में बदलने में मदद करती है। गर्भावस्था में कई बार महिलाओं को डर और चिंता सताती है, जैसे “मैं माँ बनने लायक नहीं हूँ” या “बच्चा सुरक्षित नहीं रहेगा।” CBT में काउंसलर बातचीत के ज़रिए यह समझाता है कि ऐसे विचार केवल चिंता का हिस्सा हैं, सच्चाई नहीं। इससे महिला का आत्मविश्वास बढ़ता है, तनाव कम होता है और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है।)

  • इंटरपर्सनल थेरेपी (IPT): रिश्तों और सामाजिक समर्थन को मजबूत करने पर केंद्रित।

(इंटरपर्सनल थेरेपी (IPT) - यह थेरेपी रिश्तों और सामाजिक समर्थन पर केंद्रित होती है। गर्भावस्था के दौरान महिला को अगर अकेलापन या परिवार से सहयोग की कमी महसूस हो, तो IPT बहुत उपयोगी साबित होती है। इसमें महिला को सिखाया जाता है कि वह अपनी भावनाएँ परिवार और पति के साथ कैसे साझा करे और मदद कैसे मांगे। इससे रिश्ते मजबूत होते हैं, भावनात्मक सहारा मिलता है और गर्भावस्था का अनुभव सकारात्मक बनता है।)

2. दवाएँ (Medicines – केवल डॉक्टर की देखरेख में)

गर्भावस्था में दवाओं का उपयोग बहुत सावधानी से किया जाता है क्योंकि ये बच्चे पर असर डाल सकती हैं। केवल योग्य Psychiatrist/Gynecologist की सलाह से ही दवा लेनी चाहिए।

  • एंटीडिप्रेसेंट (SSRIs जैसे – Sertraline, Fluoxetine) → अवसाद और चिंता में।

  • एंटी-एंग्जायटी दवाएँ → बहुत ही सीमित और आवश्यक स्थिति में।

  • सप्लीमेंट्स → फोलिक एसिड, आयरन, ओमेगा-3 फैटी एसिड मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर करते हैं।

3. सपोर्ट सिस्टम

  • परिवार का भावनात्मक सहयोग

  • साथी (Husband) का सहयोग और समझ

  • डॉक्टर से नियमित मुलाकात

घरेलू उपाय और सुझाव

1. आहार (Diet)

  • हरी पत्तेदार सब्जियाँ, फल, दूध और दालें खाएँ।

  • ओमेगा-3 युक्त आहार (अलसी, अखरोट, मछली का तेल – डॉक्टर की सलाह से) लें।

  • कैफीन और जंक फूड से बचें।

2. योग और व्यायाम

  • प्रेगनेंसी योग और प्राणायाम (अनुलोम-विलोम, दीप ब्रीदिंग) करें।

  • हल्की सैर (Walking) मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से लाभकारी है।

3. तनाव प्रबंधन

  • ध्यान (Meditation) और माइंडफुलनेस अपनाएँ।

  • पसंदीदा संगीत सुनें या पढ़ाई/चित्रकला जैसे शौक पूरे करें।

  • खुद को सकारात्मक माहौल में रखें।

4. भावनात्मक सहयोग

  • अपनी भावनाएँ परिवार और दोस्तों से साझा करें।

  • पति/साथी के साथ खुलकर बातचीत करें।

  • यदि कोई समस्या है तो उसे मन में न दबाएँ।

5. नींद और आराम

  • रोज़ाना 7–8 घंटे की नींद लें।

  • दिन में छोटे-छोटे ब्रेक लेकर आराम करें।

कब डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें?

  • जब उदासी या चिंता 2 सप्ताह से अधिक समय तक बनी रहे।

  • जब आत्महत्या या खुद को नुकसान पहुँचाने के विचार आएँ।

  • जब भूख और नींद पर गंभीर असर पड़े।

  • जब बच्चे या प्रसव को लेकर अत्यधिक डर और तनाव महसूस हो।

निष्कर्ष

गर्भावस्था का समय जितना खूबसूरत है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी है। इस दौरान मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। समय पर परामर्श, उचित दवाएँ (डॉक्टर की देखरेख में), जीवनशैली में सुधार और घरेलू उपाय मिलकर माँ और शिशु दोनों को स्वस्थ रखते हैं।

श्वेत प्रदर (Leukorrhea) या सफेद पानी आना: कारण, लक्षण, बचाव और इलाज

 

श्वेत प्रदर (Leukorrhea) या सफेद पानी आना: कारण, लक्षण, बचाव और इलाज


आज हम बात करेंगे एक ऐसी समस्या पर जिसे लेकर बहुत सी महिलाएं अक्सर शर्माती हैं या खुलकर बात नहीं करतीं।

वो है — श्वेत प्रदर या योनि से सफेद पानी आना।

असल में यह एक बहुत आम चीज़ है, लेकिन सबको यह समझना जरूरी है कि कब यह सामान्य है और कब यह बीमारी का संकेत हो सकता है।

तो आइए इसे बहुत आसान भाषा में और विस्तार से समझते हैं।

मासिक धर्म / पीरियड्स (Menstrual Cycle or MC)

मासिक धर्म / पीरियड्स (Menstrual Cycle or MC)

माहवारी (पीरियड्स) का चक्र

मासिक धर्म (Menstrual Cycle) की सम्पूर्ण जानकारी 
 मिथक, वैज्ञानिक सच्चाई और देखभाल के उपाय


मासिक धर्म, जिसे हम पीरियड्स, रजोधर्म या महावारी के नाम से भी जानते हैं, महिलाओं के जीवन का एक सामान्य लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके बारे में सही जानकारी देना आवश्यक है ताकि समाज में फैली भ्रांतियों को हटाया जा सके और बेटियों को आत्मविश्वास से जीने दिया जा सके।

📌 मासिक धर्म क्या है?

मासिक धर्म एक प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया है, जिसमें हर महीने गर्भाशय की परत टूटकर योनि के माध्यम से रक्तस्राव के रूप में बाहर निकलती है। यह चक्र प्रजनन क्षमता से जुड़ा होता है और सामान्यतः 28–32 दिनों के अंतराल पर आता है।

बाल झड़ने की समस्या? जानिए 10 आसान और असरदार घरेलू उपाय

बाल झड़ने की समस्या? जानिए 10 आसान और असरदार घरेलू उपाय

क्या आपके बाल हर दिन बेशुमार झड़ रहे हैं?

क्या तकिया, कंघी या नहाने के बाद बाथरूम में बालों के गुच्छे देखकर घबराहट होती है? अगर हाँ, तो आप अकेले नहीं हैं। आज के समय में बाल झड़ना एक आम लेकिन गंभीर समस्या बन गई है, जो न केवल आपकी सुंदरता, बल्कि आत्मविश्वास को भी प्रभावित करती है।

लेकिन चिंता की बात नहीं! कुछ प्राकृतिक घरेलू उपाय अपनाकर आप इस समस्या को काफी हद तक काबू में ला सकते हैं।

🤔 हर तीसरे व्यक्ति को है बाल झड़ने की समस्या – क्यों?

बाल झड़ने के प्रमुख कारण:

महिलाएं Breast Cancer से कैसे बचें? जाने की नई जांच और इलाज

Health News Center: महिलाएं Breast Cancer से कैसे बचें? जाने की नई जां...:

स्तन कैंसर से जुड़े वो सवाल जो आपके मन में आते होंगे – यहां हैं सभी जवाब

भारत में स्तन कैंसर (Breast Cancer) के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। चिंता की बात यह है कि कई बार महिलाएं इसके लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं या समय पर जांच नहीं करातीं, जिससे यह बीमारी गंभीर रूप ले लेती है। अच्छी बात यह है कि शुरुआती चरण में इसकी पहचान और सही इलाज से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। इस लेख में हम स्तन कैंसर से जुड़े सभी महत्वपूर्ण सवालों के जवाब देंगे जो आपके मन में आ सकते हैं।

स्तन कैंसर क्या है?

स्तन कैंसर एक प्रकार का कैंसर है जो स्तन की कोशिकाओं में अनियंत्रित वृद्धि के कारण होता है। यह गांठ (ट्यूमर) के रूप में बनता है और समय के साथ शरीर के अन्य हिस्सों में फैल सकता है।

मेनोपॉज की ओर बढ़ती औरतों के लिए ज़रूरी बातें

मेनोपॉज की ओर बढ़ती औरतों के लिए ज़रूरी बातें 
Important things women approaching menopause



माँ, बहन, पत्नी, बेटी — हर स्त्री अपने जीवन के हर चरण में किसी न किसी रूप में समाज की धुरी रही है। लेकिन एक ऐसा समय भी आता है जब उसका शरीर खुद बदलने लगता है — यह है मेनोपॉज, यानी मासिक धर्म का हमेशा के लिए बंद हो जाना। यह कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक जैविक परिवर्तन है।

इस दौर से गुजरती महिलाओं को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, किन लक्षणों को नजरअंदाज़ नहीं करना चाहिए और इस समय कैसे स्वस्थ, खुश और आत्मनिर्भर बना रहा जा सकता है।

पीरियड्स की तकलीफें: आसान घरेलू नुस्खे जो दिलाएं राहत

Health News Center: पीरियड्स की तकलीफें: आसान घरेलू नुस्खे जो दिलाएं राहत:

पीरियड्स की तकलीफें: आसान घरेलू नुस्खे जो दिलाएं राहत

मासिक धर्म (Menstruation) महिलाओं की शारीरिक और प्रजनन क्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा और एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है है, लेकिन इस दौरान होने वाली ऐंठन, पेट दर्द, पीठ में खिंचाव, सिरदर्द, थकान, कमजोरी और चिड़चिड़ापन अक्सर दिनचर्या को प्रभावित करता है। इससे  कई महिलाओं के लिए तनाव का कारण बन जाती हैं। 

पीरियड्स के सामान्य लक्षण: निचले पेट या पीठ में दर्द (Cramps), थकान और सुस्ती, मिज़ाज में बदलाव (Mood swings), सिरदर्द या माइग्रेन, जी मिचलाना, पाचन में गड़बड़ी (कब्ज या दस्त), त्वचा पर मुंहासे। 

पीरियड या संबंध बनाते हुए भयानक दर्द होता है तो हो सकती है ये बीमारी

स्त्री रोग में, पीरियड्स के दौरान या यौन संबंध बनाते समय असहनीय दर्द होना एक आम समस्या है, और यह एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या की ओर इशारा कर सकता है। कई बार यह दर्द सामान्य माना जा सकता है, लेकिन यदि दर्द बहुत अधिक और लगातार हो तो यह निम्नलिखित समस्याओं का संकेत हो सकता है:


1. एंडोमेट्रियोसिस 
  • एंडोमेट्रियोसिस में गर्भाशय की अंदरूनी परत का ऊतक गर्भाशय के बाहर बढ़ने लगता है। यह ऊतक अंडाशय, फेलोपियन ट्यूब और अन्य अंगों तक फैल सकता है।
  • इसके लक्षणों में अत्यधिक मासिक धर्म, संबंध बनाते समय दर्द, और पाचन संबंधी समस्याएं शामिल हैं।

ब्रा खरीदते समय कलर और डिजाइन ही नहीं, इन बातों का भी ध्यान रखें

ब्रा खरीदते समय केवल कलर और डिजाइन ही नहीं, बल्कि कुछ अन्य महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना भी बहुत ज़रूरी है। सही ब्रा चुनने से न सिर्फ आपके पहनावे में निखार आता है बल्कि इससे आपके शरीर को आराम और सपोर्ट भी मिलता है। आइए जानें किन बातों का ध्यान रखना चाहिए:

1. सही साइज का चुनाव करें 
  • गलत साइज की ब्रा पहनने से शरीर पर निशान पड़ सकते हैं और दिन भर असुविधा महसूस हो सकती है। ब्रा का साइज नियमित अंतराल पर मापें, क्योंकि वजन में बदलाव, उम्र, और लाइफस्टाइल के कारण यह बदल सकता है।
  • स्टोर पर या ऑनलाइन साइट पर मौजूद साइज गाइड का उपयोग करें और सटीक फिटिंग का चुनाव करें।
2. सपोर्ट के लिए ब्रा का प्रकार चुनें
  • अलग-अलग एक्टिविटी के लिए अलग ब्रा का चयन करें। जैसे कि रोजमर्रा के लिए टी-शर्ट ब्रा, योगा और एक्सरसाइज के लिए स्पोर्ट्स ब्रा, और किसी खास मौके के लिए पुश-अप ब्रा।
  • अगर आपको अतिरिक्त सपोर्ट की जरूरत है तो वाइड स्ट्रैप्स वाली ब्रा चुनें, जो वजन को बेहतर तरीके से संभाल सके।
3. ब्रा का मटीरियल चुनें
  • ब्रा का मटीरियल आपकी स्किन और मौसम के हिसाब से होना चाहिए। कॉटन ब्रा गर्मियों में बेहतर रहती है क्योंकि यह पसीना सोखने में सहायक होती है।
  • वेल्वेट या साटन की ब्रा ठंड के मौसम में पहनने के लिए अच्छी होती है, लेकिन इन्हें लंबे समय तक पहनने से बचें।
4. कप और स्ट्रैप्स की फिटिंग
  • ब्रा के कप्स में कोई गैप नहीं होना चाहिए। अगर कप्स छोटे हैं तो वो बहुत टाइट लग सकते हैं और बड़े हैं तो असुविधा हो सकती है।
  • स्ट्रैप्स की चौड़ाई और उनकी फिटिंग पर भी ध्यान दें। बहुत ढीले स्ट्रैप्स के कारण ब्रा का सपोर्ट कम हो सकता है और बहुत टाइट होने पर कंधों पर दबाव महसूस हो सकता है।
5. हुक्स और क्लोजर की जांच करें
  • हमेशा ब्रा के हुक्स की मजबूती और क्लोजर पर ध्यान दें। स्ट्रैप्स और क्लोजर को नियमित रूप से चेक करें कि कहीं वो जल्दी ढीले या खराब तो नहीं हो रहे।
  • नए ब्रा खरीदते समय यह ध्यान दें कि वे मिडियम हुक पर फिट हो रही हो ताकि समय के साथ ढीला होने पर आप टाइट हुक्स का इस्तेमाल कर सकें।
6. सही ब्रा वाशिंग टेक्निक का इस्तेमाल करें
  • ब्रा की उम्र बढ़ाने के लिए उसे हाथ से धोना बेहतर होता है। वॉशिंग मशीन का इस्तेमाल करने पर ब्रा का स्ट्रक्चर और इलास्टिक जल्दी खराब हो सकता है।
  • धोते समय हल्के डिटर्जेंट का इस्तेमाल करें और ब्रा को ज्यादा मोड़ने से बचें। 
सही ब्रा चुनने में ध्यान रखें कि यह न केवल आपके आउटफिट को बेहतर बनाती है बल्कि आपके शरीर को भी उचित सपोर्ट प्रदान करती है। जब भी ब्रा खरीदने जाएं तो इन बातों का ध्यान रखें और अपने आराम को प्राथमिकता दें। सही ब्रा से आपके आत्मविश्वास में भी इजाफा होगा।

योनिशोथ (Vaginitis) माहीलाओ मे होने वाली आम बीमारी


 योनिशोथ (Vaginitis)


यह एक प्रकार की सूजन है जो खुजली, गंध, डिस्चार्ज और दर्द का कारण बन सकती है।
योनि की सूजन जिससे उसमें से स्राव, खुजली और दर्द हो सकता है.
आमतौर पर योनी में सूजन, योनि के जीवाणुओं के सामान्य स्तर के गड़बड़ाने, किसी संक्रमण या रजोनिवृत्ति (माहवारी बंद होने) के बाद एस्ट्रोजन के स्तर में कमी के कारण होती है.

जाने महिलाओं के प्राइवेट पार्ट में खुजली के कारण एवं उपचार


प्राइवेट पार्ट
 में खुजली के कई कारण हो सकते हैंजिनमें से कुछ प्रमुख कारण ये हैं:

यीस्ट या खमीर संक्रमण :

इसके वजह से वजाइना के आस-पास कॉटेज चीज़ जैसा डिस्चार्जलालिमाऔर खुजली होती है. खमीर या यीस्ट संक्रमणएक तरह का संक्रमण है जो कैंडिडा एल्बिकेंस नाम के यीस्ट की वजह से होता है. यह संक्रमण आमतौर पर शरीर के गर्म और नम हिस्सों में होता हैजैसे कि प्राइवेट पार्ट  के मुंह और त्वचा के नम क्षेत्र में होने वाले यीस्ट संक्रमण को वुल्वोवैजिनल कैंडिडिआसिस कहते हैं.

बैक्टीरियल वेजिनोसिस: इसमें प्राइवेट पार्ट के बैक्टीरिया में असंतुलन की वजह से खुजली और असामान्य स्राव हो सकता है.

यौन संचारित संक्रमण (एसटीआई) जिसमें ट्राइकोमोनिएसिस या जननांग दाद जैसी कुछ एसटीआई Vagina में खुजली के रूप में प्रकट हो सकते हैं.

एक्ज़िमा और सोरायसिस जैसी त्वचा के रोग की स्थिति प्राइवेट पार्ट क्षेत्र में लालिमा और खुजली पैदा कर सकती है.

रजोनिवृत्ति के दौरान हार्मोनल बदलावों की वजह से भी Vagina का सूखापन और खुजली हो सकती है.

Vagina में वैजिनाइटिस होने वाली सूजन या संक्रमण की स्थिति में महिलाओं को Vagina में खुजलीदर्दऔर जलन हो सकती है।

 

इसके अलावाखुजली के ये कुछ और भी कारण हो सकते हैं:

       साबुनडिटर्जेंटया सिंथेटिक कपड़ों से भी खुजली और जलन हो सकती है।

       Vagina पर खुशबु वाले स्प्रे या परफ़्यूम लगाना से भी खुजली और जलन हो सकती है।

       गंदे टॉयलेट पेपर का इस्तेमाल से भी खुजली और जलन हो सकती है।

       गर्भनिरोधक दवाओं का सेवन से भी खुजली और जलन हो सकती है।

 

प्राइवेट पार्ट में खुजली के उपचार

  • यीस्ट संक्रमण से राहत पाने के लिएप्रिस्क्रिप्शन या ओवर-द-काउंटर एंटीफ़ंगल क्रीम या सपोसिटरी का इस्तेमाल किया जा सकता है.
  • बैक्टीरियल वेजिनोसिस जैसे जीवाणु संक्रमण के लिए एंटीबायोटिक्स  का उपयोग किया जा सकता हैं.
  • गंभीर खुजली के लिएकॉर्टिकोस्टेरॉयड क्रीम से राहत मिल सकती है.
  • प्राइवेट पार्ट की स्वच्छता बनाए रखना अति आवश्यक है। हल्केखुशबू रहित साबुन से हल्की सफ़ाई करें और हल्का और सॉफ्ट सूती अंडरवियर पहनें.
  • सुगंधित उत्पादोंडूशऔर कठोर रसायनों से दूर रहें.
  • डिटर्जेंट बदलना और अंडरवियर को ज़्यादा बार बदलना भी मदद कर सकता है.

खुजली के लिए कुछ घरेलू उपचार भी अपनाए जा सकते हैंजैसे कि:

  •  यीस्ट संक्रमण के लिए प्रभावित जगह पर  दही और शहद का मिश्रण एक प्रभावी उपाय है.
  •  बेकिंग सोडा का इस्तेमाल नहाने के पानी में मिलाकर या पेस्ट के रूप में किया जा सकता है. यह सूखी त्वचा से होने वाली खुजली से राहत दिलाता है.
  • कोलाइडल ओटमील को नहाने के पानी में मिलाकर स्नान करने से कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस या एक्जिमा से होने वाली खुजली में आराम मिलता है.
  • नीम के तेल या पत्ते  के पेस्ट का इस्तेमाल किया जा सकता है. नीम एक सक्रिय परजीवी विकर्षक  (parasite repellent) है।
  • मुल्तानी मिट्टी का पेस्ट सूखी त्वचा से होने वाली खुजली से राहत दिलाता है.

अगर खुजली लगातार बनी रहती है या अन्य लक्षण (जैसे दर्दजलन या असामान्य डिस्चार्ज) हैंतो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। 

 


पीरियड के बिना भी प्राइवेट पार्ट से खून क्यों आता है?



पीरियड्स होने वाले थे. पेट में दर्द शुरू हो गया था. मूड खराब रहने लगा था. पर जब भी वो चेक करती तो उसे सिर्फ ब्लड स्पॉटिंग दिखती. पीरियड के दौरान आम तौर पर जितनी ब्लीडिंग होती है, उतनी स्पॉटिंग में नहीं होती. पर इसका मतलब ये नहीं कि तीन दिन के अंदर स्पॉटिंग खत्म हो जाती है. ये हफ्ता से लेकर महीने तक चलती है. जब डॉक्टर के पास गई तो पता चला यह हॉर्मोन्स की उथल-पुथल की वजह से हो रहा था.
वैसे, औरतों के शरीर में होने वाले बदलावों के पीछे ज़्यादातर हॉर्मोन्स ही ज़िम्मेदार होते हैं. पर स्पॉटिंग के पीछे बस यही एक वजह नहीं है. और भी कारण हैं. जैसे:

Ladies Health - ब्रेस्ट में दर्द की पांच वजहें

 ब्रेस्ट में दर्द होना एक आम दिक्कत है. क्या आपके साथ भी ऐसा होता है? अव्वल तो सबके मन में कैंसर का ही ख़याल आता है. पर ब्रेस्ट में दर्द के लिए सिर्फ कैंसर ही ज़िम्मेदार नहीं होता. 


आमतौर पर ब्रेस्ट में दर्द की पांच वजहें होती हैं - स्त्रीरोग विशेषज्ञ हैं.

1. क्या आपको पीरियड्स होने वाले हैं?

HOW TO CREATE A WORKOUT ROUTINE AND STICK TO IT

One of the keys to a successful, healthy and happy life is fitting in a workout. But we’re all busy! That’s why it’s important to have a set routine for your morning walk, tai chi or yoga practice, or after-work trip to the gym. Making fitness a regular part of your day turns it into a habit you won’t break. Here’s how to get started creating your workout routine.

1. Start Where You Are

Take a deep breath, find a quiet place, and focus on what motivates you to persevere. If you can’t afford a gym membership or a personal trainer, there are ways to exercise at home to improve your health. Assess what you can afford and what will benefit you the most.

स्तन कैंसर से बचना है तो खूब खाएं फल, सब्जियां

हरी साग-सब्जियों और फलों का भरपूर मात्रा में सेवन महिलाओं में स्तन कैंसर की समस्या कम करने में सहायक हो सकता है।
एक नए अध्ययन से यह सामने आया है। शोध की यह रिपोर्ट जर्नल ऑफ नेशनल कैंसर इंस्टि्टय़ूट में प्रकाशित हुई है।

समाचार पत्र 'डेली एक्सप्रेस' में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, हरी सब्जियों और फलों में एंटी-ऑक्सीडेंट होता है। ये शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाते हैं, जो स्तन में कैंसर के ऊतकों का विकास रोकते हैं।

Natural Home Remedies for Asthma Treatment



Although there are many medical ways to help asthma sufferers breathe easier, experts recommend combining certain natural home remedies with prescription anti-inflammatories and bronchodilators. Here are some helpful remedies right from the kitchen.

Home Remedies From the Cupboard
Coffee. The caffeine in regular coffee can help prevent and control asthma attacks. Researchers have found that regular coffee drinkers have one-third fewer asthma symptoms than those who don't drink the hot stuff. The reason? Caffeine has bronchodilating effects. In fact, caffeine was one of the main anti-asthmatic drugs during the nineteenth century. Don't load up on java, though -- three cups a day will provide the maximum benefit -- and don't give coffee to children with asthma.

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