उम्र के साथ सौंदर्य


शब्द "एजिंग" के साथ एक बहुत गलत धारणा जुड़ी हुई है। एजिंग का नाम लेते ही आपके दिमाग में आमतौर से सफेद बाल, याददाश्त की कमजोरी और अकेलेपन के शिकार बुजुर्ग की छवि प्रकट होती है हालांकि एजिंग की सभी निराशाजनक दशायें वास्तव में सत्य नहीं हैं। एजिंग का अर्थ है अपनी क्रॉनालाजिकल क्लॉक के चलते जाने के साथ खुद को मेच्योर करना, अनुभवों से समृद्ध होना, बुद्धिमत्ता और समग्र रूप में जीवन की बेहतर समझ।

एजिंग को अभिशाप मानने के बजाय इसे जीवन का ऐसा स्तर मानें जो आपके विकास के शुरूआती वर्षों की तरह ही खूबसूरत हो सकता है। आपके कितने मित्र वास्तव में अपने बच्चों को अभिभावकों के रूप में बड़े होते देखते हैं? इसलिये "एजिंग का सामना" मत करें बल्कि एजिंग के इस चरण को सम्मान और बड़प्पन की अठारह वर्षीय भावना के साथ महसूस करें। आपका जेनेटिक मेक-अप और सभी तरह के पर्यावरणीय खतरों का असर होने की संभावनाएं समय से पहले प्रीमेच्योर एजिंग का कारण बन जाती हैं, इस तरह से अपनी लाइफस्टाईल में कुछ बदलाव लाकर आप एजिंग प्रक्रिया को एक खुशनुमा अनुभव में तब्दील कर सकते हैं।

लाइफस्टाईल में स्वास्थ्यप्रद बदलाव आपके आहार पर ध्यान देने से शुरू होते हैं एन्टिऑक्सीडेंट्स से भरपूर खान-पान एजिंग प्रक्रिया को देर से शुरू कर सकता है। फ्री रेडिकल्स ऐसे अस्थिर अणुओं के ग्रुप होते हैं जो एजिंग, टिश्यू डैमेज और अन्य बीमारियों के लिये जिम्मेदार हैं।

एन्टिऑक्सीडेंट्स से भरपूर डाइट फ्री रेडिकल्स को स्वस्थ टिश्युओं पर हमला करने से रोकती है जिससे एजिंग की प्रक्रिया देर से शुरू हो पाती है। फ्री रेडिकल्स शरीर की उपापचयी (मेटाबोलिक) प्रक्रिया का बाई-प्रोडक्ट हैं लेकिन ये अधिक संख्या में नहीं होते। अन्य स्रोत हैं प्रदूषित वातावरण, स्मोकिंग, सूरज की एक्स-रे और अल्ट्रावायलेट किरणें। हरी चाय और हल्दी के अलावा फल और सब्जियां ‘जो गहरे रंग के हों’ एन्टिऑक्सीडेंट्स के अच्छे स्रोत हैं। एन्टिऑक्सीडेंट्स न केवल एजिंग को देर से शुरू करने में सहायक हैं बल्कि कैंसर तथा अन्य बीमारियों की रोकथाम भी करते हैं। हमारी उम्र बढ़ने के साथ कम फैट और फाईबर से भरपूर खान-पान आदर्श माना जाता है।

एंड्यूरेंस मज़बूत बनाने और बढ़ाने वाली तथा लचीलापन बढ़ाने में सहायक गतिविधियों से भरपूर एक्सरसाइज रूटीन अपनाने से एजिंग देर से शुरू हो पाती है क्योंकि आपका गठन बेहतर हो जाता है। एंड्यूरेंस एक्सरसाईजेज हृदय का भी व्यायाम कराती हैं जिससे हृदय का स्वास्थ्य बेहतर होता है और दिमाग में अधिक पम्प किया जाने वाला रक्त मेमोरी, मूड और नींद की गुणवत्ता को बेहतर बनाता है। शारीरिक व्यायाम मूड बूस्टर की तरह काम करके तनाव से राहत ढूंढ़ने वालों की ज़रूरत पूरी करते हैं क्योंकि एक्सरसाईजिंग के दौरान मस्तिष्क अधिक एंडार्फिन रिलीज करता है जो "हैप्पी हार्मोन्स" होते हैं और आपके युवा दिखते रंगरूप को बरकरार रखते हैं। रक्‍त सभी अंगों से विशेषकर टॉक्सिन्स निकालते हुए किडनीज की क्षमता बढ़ाने और इन्हें स्वस्थ रखने में सहायक होता है, जिन पर उम्र का काफी असर पड़ता है। मज़बूती और लचीलापन बढ़ाने वाली एक्सरसाईजेज पतनकारक (डिजेनरेटिव) समस्याओं जैसे कि ऑस्टियोपोरोसिस और फ्रैक्चर्स को दूर रखने में सहायक हैं। वॉकिंग, स्विमिंग, लाइट वेट ट्रेनिंग और योगा जैसी एक्सरसाईजेज किसी अन्य व्यायाम की तरह खूब लाभदायक साबित होती हैं।

एजिंग के अनिवार्य बदलावों को स्वीकार करें और अपने मन को अनावश्यक तनाव से मुक्त रखें। अध्ययनों से मालूम चला है कि तनाव डीएनए को नुकसान पहुंचाते हुए एजिंग प्रक्रिया को तेज करता है और टिश्युओं को डैमेज करने का कारण बनता है। जीवन की अनिश्चितता या अधिक उम्र को अपने पर हावी न होने दें ताकि जिंदगी तनावग्रस्त होने से बची रह सके। उम्र के साथ होने वाले बदलावों का अनुमान लगायें-शारीरिक बदलाव, लाइफस्टाईल में बदलाव, रिश्तों में बदलाव और खुद को इनके लिये मानसिक रूप से तैयार करें।

परिवार और मित्रों में एक मज़बूत सोशल सपोर्ट नेटवर्क तैयार करें जो न केवल आपको इमोशनल सपोर्ट में साथ दे बल्कि आपमें पॉजिटिव भी विकसित हो सके और आप नयी चीजें सीखें। आज के दौर में पारिवारिक रिश्ते बदल गये हैं और बुजुर्ग अभिभावकों को अनेक परिवारों में बोझ माना जाने लगा है इसलिये यह ज़रूरी हो गया है कि आप अपना अच्छा स्वास्थ्य मेन्टेन करके, अपनी आर्थिक सुरक्षा मज़बूत करके और अपना सामाजिक दायरा विकसित करके अपने इंचार्ज आप बनें। खुद को ऐसी गतिविधियों में लगायें ताकि नयी चीजें सीखते हुए, पहेलियों को सुलझाते हुए आपके दिलोदिमाग को नयी ऊर्जा मिले।

Source - onlyMyhealth

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